भावना और उसके चोदु अंकल की कहानी

भावना और उसके चोदु अंकल – Part -1

मैं भावना, आगे 20 साल. हम गाँव में रहते था. मेरे अंकल खेती बाड़ी करते हैं. जब मैं छोटी थी तो अंकल ने मुझे गाँव के स्कूल में डाल दिया. वो स्कूल 12त तक था. 12त के बाद मैंने अंकल से कहा की मैं आगे पड़ना चाहती हूँ पर हमारे गाँव में कोई कॉलेज नहीं था इसलिए मुझे शहर आना पड़ा.शहर आकर मेरा एडमीशन एक गर्ल्स कॉलेज मैं हो गया और मैं शहर में ही एक गर्ल्स हॉस्टल में रहने लगी. अंकल ज्यादा पड़े-लिखे नहीं हैं इसलिए उन्होंने मुझे कहा था की पढ़ाई के मामले में मैं जैसे ठीक समझू करलूँ.

शहर आ कर मैं तो हक्की-बाकी रही गयी. शहर की लड़कियों के कपड़े देख कर मुझे लगा की मुझे वापस गाँव चले जाना चाहिए…कहीं मैं शहर के माहौल में बिगड़ ना जाऊं. लेकिन फिर सोचा के मुझे तो पढ़ाई से मतलब हैं नकी माहौल से. अंकल कभी शहर नहीं आए था. मेरा एडमीशन करने भी मैं अपनी स्कूल की मैडम के साथ आई थी. अगर अंकल शहर आते और यहाँ की लड़कियों के कपड़े देखते तो शायद मुझे यहाँ कभी ना पड़ने देते.

हमारे गाँव में लड़कियाँ सिर्फ़ सलवार सूट ही पहनती थी और वो भी काफी लूस. शहर में तो किसी लड़की को लूस का मतलब ही नःन पता था. जिसे देखो टाइट @जीन्स, टाइट टी-शर्ट, स्लीवेलएशस शर्ट, स्कर्ट, और अगर सलवार कमीज़ तो वो भी बहुत टाइट. यहाँ तक की हमारे कॉलेज की टीचर्स भी ब्लाउज पहनती तो दीप कट और कुछ टीचर्स तो सारी नेवेल के नीचे बाँधती थी. लेकिन मैं तो वही लूस सलवार कमीज़ पहनती थी. शहर मैं जहाँ देखो दीवारों पर अडल्ट फिल्मों के पोस्टर लगे होते था जिसमें हीरो-हीरोइन नंगे होकर प्यार कर रहे होते था. हमारे हॉस्टल की लॉबी में एक त.भी. भी था. क्योंकि हमारे गाँव में त.भी. नहीं था इसलिये मुझे त.भी. चलना नहीं आता था लेकिन हॉस्टल में एक लड़की ने मुझे सीखा दिया. त.भी. पर आड्स, फिल्में और गाने देख कर मैं हैरान रही गयी. मुझे लगा कितनी गंदगी है शहर में.

इन सब चीज़ों ने मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल मचा दी थी. रोज़ रात को सोते वक्त मैं यह सोचती थी की शहर में इतना ननगपन क्यों है. एक दिन हॉस्टल के त.भी. पर मैं अकेली ही एक फिल्म देख रही थी. फिल्म में लड़का लड़की के होठों पर किस करता है. मैंने सोचा क्या होठों पर भी किस होती है. फिर लड़का लड़की के मौत में अपनी जीभ डाल देता है और दोनों एक दूसरे की जीभ चाट-टे हैं. यह सब देख कर मुझे कुछ होने लगा और मैंने त.भी. बंद कर दिया. लेकिन सोचा देखती हूँ क्या-क्या होता है सो टीवी फिर से ऑन कर दिया. अब लड़का लड़की की शर्ट ऊपर करके उसके पेट पर किस कर रहा होता, फिर वो लड़की की शर्ट उतार कर उसके ब्रेस्ट दबाने और चूसने लगता है, फिर लड़की की @जीन्स निकलता ही, फिर कच्ची(पैंटी) और फिर उसके टाँगों के बीच में चाट-ने लगता है. फिर वो अपनी पेंट उतार कर अपना लंड लड़की की चुत मैं डाल कर आगे-पीछे करने लगता है. यह सब देख कर मेरी हालत खराब हो गयी और मैं टीवी बंद करके सोने चली गयी. ऐसी फिल्म रोज़ आती थी और मैंने रोज़ ही देखती थी. मैंने नोटिस किया की यह सब देखने में मुझे मजा आता है और सोचने लगी की असली में सेक्स करने में कितना मजा आता होगा. अब मुझे पता चला की शहर की लड़कियाँ एरॉटिक कपड़े क्यों पहनती हैं…असल में उन्हें सेक्स में मजा आता है और वो उससे बुरा नहीं मानती.

हमारे कॉलेज की कुछ छुट्टियाँ हुईं तो मैं गाँव चली आई. अंकल आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हुए. कुछ देर तक मेरी पढ़ाई के बारे में पूंछ कर अंकल खेत में चले गये और मैं आंटी से बातें करती रही. दोपहर हुई तो आंटी ने कहा :
मम्मी : भावना, मैं तेरे अंकल को खेत में रोती देने जा रही हूँ
मैं : लाओ आंटी, मैं दे आती हूँ, बहुत दीनों से अपने खेत भी नहीं देखे, खेतों की भी बहुत याद आती है
मम्मी : ठीक है, तू ही दे आ, पहले भी तो टू ही जाती थी

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