लंड और चूत जैसे आग और फूस- 1

जवानी दीवानी हो जाती है जब एक जवान लड़की और एक जवान लड़के को पास पास रहने को मिले तो दोनों के जिस्म की आग भड़कना स्वभाविक ही है. ऐसा ही हुआ जब सीमा के पिता के दोस्त का बेटा उनके घर रहने लगा.

दोस्तो, आज की कहानी घर घर की एक पुरानी कहावत “आग और फूस का बैर” पर आधारित कहानी है.

माना जाता है कि अगर फूस के पास आग जल रही हो तो फूस में आग लगना तय है.

अब अगर जवान साली जीजा के पास अकेले में हो तो आग भड़कनी स्वाभाविक है.
कुछ ऐसी ही सोच पर आधारित है आज की कहानी.

सीमा और बिंदिया वैसे तो चचेरी बहनें हैं पर दोनों आपस में दोस्तों की तरह रही हैं.
हर बात में एक दूसरे की राजदार.

सीमा वैसे तो बिंदिया से दो साल बड़ी है और बला की खूबसूरत है. दोनों बहुत ही चंचल और खुराफाती.
पर पढ़ने में तेज.

सीमा के पिता ने नौकरी से जल्दी वी आर ऐस ले लिया.
पैसे की कोई कमी थी नहीं.
शहर में पुश्तैनी बड़ा मकान था और काफी जायदाद.
किराए की खासी आमदनी थी.

बिंदिया के मां बाप शहर के बाहर एक कॉलोनी में रहते थे.
बिंदिया और सीमा एक ही कॉलेज में थीं तो बिंदिया अक्सर ही सीमा के पास रुककर पढ़ाई करती.

कोठी में सीमा के मां-पिताजी नीचे वाले हिस्से में रहते थे.
नीचे ही सीमा का भी रूम था पर पढ़ाई के लिए उसने ऊपर की मंजिल पर एक कमरा चुन रखा था.
मकान बड़ा था, आधुनिक सुख सुविधाओं से सुसज्जित.

सीमा के पिताजी अशोक रंगीन किस्म के व्यक्ति थे.
उनका और उनकी पत्नी सुनीता की सेक्स लाइफ आज भी भरपूर रोचक थी.
रात के डिनर के बाद सुनीता और अशोक कमरे में घुस जाते.
फिर कान लगाकर सुनने पर सुनीता की आहें और सिसकियाँ देर रात तक सुनाई देतीं.

पर सीमा और बिंदिया इन सबसे बेखबर अपने ऊपर के कमरे में पढ़ाई में लगी रहतीं.

सीमा को जवानी ज्यादा चढ़ रही थी.
वो कभी कभी पढ़ाई की किताबें फेंककर पोर्न लगा देती मोबाइल पर.

बिंदिया लाख मना करती पर फिर तो सीमा अपने और बिंदिया के कपड़े उतार कर लेस्बियन जवानी दीवानी हो जातीं.
सीमा ने किताबों के बहाने ऑनलाइन वाईब्रेटर मंगा रखा था.
वो अपनी के साथ साथ बिंदिया की चूत भी हमेशा चिकनी रखती.

सीमा बिंदिया के ऊपर चढ़ जाती और अपनी चूत से उसकी चूत खूब रगडती.
बिंदिया के मम्मे सीमा से भारी थे तो सीमा उन्हें खूब चूसती.

बिंदिया की मां की तबियत पिछले दिनों से काफी खराब थी तो बिंदिया अब अपने ही घर से कॉलेज आती जाती.

सीमा का कॉलेज पूरा हो गया था.
उसने स्थानीय एमबीए कॉलेज में एडमिशन ले लिया था.
साथ ही वो इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स भी कर रही थी.
दो साल का कोर्स था.

ये समय कैसे निकल गया पता ही नहीं चला.
उसके कॉलेज में फाइनल इयर में उसके साथ एक लड़का था वरुण… जो पढ़ने में बहुत होशियार और स्मार्ट था.
उसकी इंग्लिश स्पीकिंग भी बहुत सुधरी हुई थी.
सीमा की उससे दोस्ती हो गयी.

वरुण जिस पीजी में रहता था, वहां माहौल अच्छा नहीं था.
उसके पिता किसी तरह सीमा के पिता अशोक के परिचित थे.
तो उन्होंने अशोक ज़ी से वरुण के लिए कोई कमरा देखने को कहा.

अशोक ज़ी ने सहज स्वभाव उनसे कह दिया कि वरुण उन्हीं के घर रह लेगा.

हालाँकि बाद में उनकी पत्नी ने ऐतराज किया कि घर में जवान लड़की है. वही आग और फूस की बात उन्होंने कही.
पर अशोक ज़ी हंस कर बोले- वो जवान लड़की दिन भर तो वरुण के साथ ही रहती है. अब घर पर भी रह लेगी तो क्या.

हाँ, इतना जरूर कि अब सीमा को पढ़ाई नीचे ही करने की बात कह दी अशोक ज़ी ने.
ऊपर के पोरशन का एक जीना बाहर से भी था.
पर अंदर वाला जीना भी हरदम खुला ही रहता.

अब वरुण सीमा के घर ही रहने लगा.
उसका स्वभाव इतना अच्छा था कि सुनीता ज़ी ने रात का डिनर उससे नीचे करने को ही कह दिया.

अब सीमा वरुण के साथ ही बाइक पर कॉलेज जाने लगी.

वरुण सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा था.
उसे पूरी उम्मीद थी कि वो क्लियर कर लेगा.

सीमा के पिताजी को वरुण बहुत पसंद था.
उन्होंने बातों बातों में वरुण से शादी के लिए पूछा तो उसने कहा कि जब तक वो सिविल सर्विसेज की नौकरी नहीं पा लेता, तब तक वो शादी नहीं करेगा.
मतलब अगले दो तीन साल तो वो शादी करने वाला था नहीं.

अब सीमा और बिंदिया दोनों को ही वरुण से हेल्प मिलनी शुरू हो गयी.
सच तो यह था कि उन तीनों के मन बिल्कुल साफ़ थे. कोई आकर्षण नाम की चीज़ नहीं थी.

बिंदिया जब भी सीमा के घर रुकती, वो रात को बिना कपड़ों के चिपटकर ही सोतीं.
सीमा के माँ पिताजी की तो कोई टेंशन नहीं थी.
वो तो एक बार कमरे में घुसे तो सुबह ही नजर आते.

बिंदिया तो अक्सर सीमा को छेड़ती की कहीं ऐसा न हो की चाची चाचाजी तेरे लिये दहेज़ में एक भाई भी भेज दें.
दोनों हंस पड़तीं.

बिंदिया सीमा को टोकती- वैसे ही मेरे मम्मे भारी हैं, तू और चूस चूसकर इन्हें बड़ा कर दे.
पर साथ ही बिंदिया सीमा की चूत की अपनी उंगली से ऐसी मसाज करती कि वो पानी छोड़ जाती.

दिन में उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता कि रात को उन्होंने क्या गुल खिलाये हैं.

बिंदिया की मां की तबियत फिर बिगड़ी तो बिंदिया ने घर पर ही रुककर पढ़ाई करनी शुइरू कर दी.

बारिश का मौसम था.
सीमा और वरुण कॉलेज से आते में बिल्कुल भीग गए.

अब सीमा के दिल में वरुण के लिए कुछ कुछ होने लगा था.
पर वरुण अपने कैरियर के प्रति सजग था तो अब तक उसने कोई प्रतिक्रया नहीं दी थी.

पर आज की बारिश ने उन्हें नजदीक ला दिया.
बारिश तेज होने पर दोनों एक रेस्टोरेंट में रूककर कॉफ़ी पीने लगे.

सीमा का मदमस्त गदराया जिस्म बारिश में भीगे कपड़ों से बाहर झाँक रहा था.
वरुण के मन में पहली बार सीमा को देखकर कोई भावना जगी.

सीमा ठण्ड से काँप रही थी.
वरुण ने उसका हाथ थाम लिया.
सीमा ने उसकी आँखों में झांका.
दोनों के मन में प्यार का बीज पनप गया था.

बारिश रुक गयी थी.
सीमा अब बाइक पर चिपक कर वरुण से बैठी और वरुण ने भी लंबा रास्ता पकड़ा घर पहुँचने के लिए. मौक़ा देखकर सीमा ने पीछे से वरुण को चूम लिया.

घर पहुँचने पर दोनों को सुनीता ज़ी से डांट पड़ी और उन्होंने दोनों से कपड़े बदलने को कहा.

सुनीता ने अदरक वाली कड़क चाय बनायी और सीमा से कहा कि जाकर ऊपर वरुण को भी दे आ.
सीमा ऊपर नहीं जाना चाह रही थी.
पर सुनीता ज़ी ने दो बार कहा तो वो ऊपर चली गयी.

ऊपर वरुण केवल शॉर्ट्स में था.
सीमा को देखकर उसने जल्दी से टी शर्ट डाली.

सीमा ने चाय टेबल पर रखी और जाने लगी.
वरुण ने हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी ओर खींचा.

सीमा उसके आगोश में जा गिरी.
दोनों के होठ मिल गये; जिस्म कस के भिंच गए.

पर तभी सीमा को नीचे से मां की आवाज आई तो वो अपने को छुड़ाकर भाग गयी.
सीमा को रात को बुखार आ गया था.

वरुण ही जाकर उसके लिए दवाई लाया.

अगली सुबह वैसे तो सीमा की तबियत ठीक थी पर सीमा वरुण से दूर ही रहना चाह रही थी.
उसका दिल उसके काबू में नहीं था.

उसने मां से झूठ बोल दिया कि आज वो कॉलेज नहीं जायेगी क्योंकि उसकी तबियत ठीक नहीं है.

दिन में वरुण ने कई बार उसे फोन किया पर सीमा ने हाय हेलो के अलावा बात नहीं करी.
उसकी तबियत सुनकर शाम को बिंदिया भी आ गयी और रात को वहीं रुक गयी.

रात को बिंदिया को सीमा कुछ अलग सी महसूस हुई.
आज उसकी जिस्म की गर्मी कुछ अलग हालात बयान कर रही थी.

उसने सीमा से पूछा तो वो बोली- तू बहुत दिनों बाद मिली है न इसीलिए.

अगली सुबह सीमा तो वरुण के साथ ही कॉलेज गयी, बिंदिया अपने कॉलेज चली गयी.

दोपहर को कैंटीन में वरुण ने सीमा से पूछा- क्या बात है?
सीमा बोली- मैंने एक जॉब के लिए अप्लाई किया था, वहां से इंटरव्यू की खबर आई है. मुझे जॉब मिल ही जाएगा. इधर घर वाले शादी के लिए पीछे पड़ रहे हैं. मैं तुमसे प्यार करती हूँ.
वरुण ने उदास होकर कहा- तुमसे अच्छी लड़की मुझे दूसरी मिल नहीं सकती. पर मुझे अभी दो तीन साल रुकना होगा. अगर तुम मेरा इन्तजार कर सको तो मैं तुम्हारा हूँ.

बात असमंजस की थी.
पर घर लौटते में बाइक पर सीमा वरुण से चिपट कर बैठी और कुनमुनाते हुए बोली- मुझे तेरी ही बनना है.
वरुण ने भी हाथ पीछे करके उसका हाथ पकड़ लिया.

रात को अशोक और सुनीता तो अपने कमरे में चले गये.
वरुण ऊपर था और सीमा अपने कमरे में.

वरुण का फोन सीमा के पास आया.
वो उसे ऊपर बुला रहा था.

सीमा ने उससे कहा- पागल हो गये हो क्या? मैं ऊपर कैसे आ सकती हूँ.

वरुण बार बार मिन्नतें करने लगा.
वो अंदर वाले जीने में नीचे तक आ गया था.

सीमा दबे पाँव जीने में पहुंची.
वरुण ने उसे अपने से चिपटा लिया.
दोनों एक दूसरे को ताबड़-तोड़ चूमने लगे.

सीमा रोने लगी- मुझे तेरी ही बनना है.
वरुण बोला- सिविल सर्विसेज मेरा सपना है. बस दो तीन साल मेरा इंतज़ार कर ले, फिर जिन्दगी भर के ठाठ कराऊंगा.

सीमा का दिल उसके काबू में नहीं था.
वरुण के हाथ उसके जिस्म पर घूम रहे थे.
केवल नाईटी ही तो पहनी थी उसने, नीचे कुछ नहीं.

वरुण भी बरमूडा पहने था.
उसका लंड तना हुआ सीमा की चूत पर टक्कर दे रहा था.

सीमा घबरा रही थी.
उसने अपने को जबरदस्ती छुड़ाया और कमरे में आ गयी.

वो देर रात करवटें बदलती रही, सो नहीं पायी.
ऊपर से वरुण बार बार मेसेज और फोन करता रहा.

देर रात दो बजे करीब वरुण उसके कमरे में ही आ गया.

सीमा का तो हलक सूख गया.
उसने झट से किवाड़ बंद किया.
दोनों सूखी बेल की तरह लिपट गये.

वरुण ने एक झटके में सीमा की नाईटी और अपने कपड़े उतार फेंके.
दो गर्म जिस्म एक होने को मचल उठे.
दोनों के लिए ही यह पहली बार था.

वरुण ने किसी लड़की के नग्न जिस्म को पहली बार छुआ था.
दोनों बेड पर आ गये.

वरुण सीमा के मम्मे मसलने और चूसने लगा.
सीमा उसकी कमर पर हाथ लपेटे उसे लिपटी हुई थी.

सीमा ने हाथ नीचे किया तो उसके हाथ में वरुण का फनफनाता हुआ लंड आ गया.
दोनों ने सेक्स भले ही पहले कभी न किया हो पर पोर्न तो खूब देखी थी.

वरुण नीचे हो गया और उसने अपनी जीभ सीमा की चिकनी गुलाबी फांकों पर रख दी.
सीमा की चूत पानी छोड़ रही थी.
सीमा ने अपनी उँगलियों से अपनी फांकें चौड़ा दीं तो वरुण ने फांकों को चाटते हुए जीभ अंदर घुसा दी और लगा चुभलाने.

अब जवानी दीवानी सीमा मचलने लगी.
उसने आहें भरते हुए वरुण से कहा- मुझे भी तुम्हारा चूसना है.

वरुण उलटा हो गया और अब दोनों 69 होकर एक दूसरे के चूसने लगे.
सीमा चुदवाने को बेक़रार थी पर उसे डर भी लग रहा था कि बिना प्रोटेक्शन के सेक्स… कुछ हो गया तो.

वरुण का लंड भी तनकर तैयार था.
वरुण वापिस सीधा हुआ और सीमा की टांगें चौड़ाकर अपना लंड घुसाने को तैयार हुआ.

सीमा आहें निकालती हुई बोली- अंदर नहीं करेंगे क्योंकि प्रोटेक्शन तो है नहीं.

अब खड़े लंड पर रुकना वरुण के लिए भी संभव नहीं था.
चूत सीमा की भी बगावत को तैयार थी.

वरुण ने सीमा को चूमते हुए कहा- कल मैं तुम्हें दवाई ला दूंगा.
कहते-कहते वरुण ने लंड को चूत के मुहाने पर रख दिया.

सीमा डर रही थी- धीरे धीरे करना, तुम्हारा बहुत मोटा है. मुझे दर्द हो तो प्लीज़ निकाल लेना.

वरुण ने पास रखी क्रीम से ढेर सारी क्रीम अपने लंड और सीमा की फांकों पर लगाई और सीमा के होंठों पर होंठ रख धीरे से लंड को अंदर दरका दिया.
सीमा की जोर से आह निकल गयी.

वरुण ने उसके मुह पर हाथ रख दिया और फिर पेल दिया पूरा लंड अंदर.
सीमा छटपटाने लगी.

वरुण ने अपना लंड निकालना चाहा तो सीमा ने उसे कस के भींच लिया और कसमसाते हुए बोली- निकालना नहीं. बस धीरे धीरे करो.

अब क्या था … वरुण ने पेलमपेल शुरू कर दी.
जल्दी ही सीमा भी संगत करने लगी. वो नीचे से पेल लगा रही थी. वरुण ऊपर से पेल रहा था.

लंड चूत की गहराई में खो गया था.
अब वरुण ने भी स्पीड बढ़ा दी.
सीमा को मजा अ रहा था.

जल्दी ही दोनों हांफने लगे.
सीमा उसे उकसा रही थी- और जोर से करो.

दोनों ये भूल गए थे कि बगल के कमरे में सीमा के माँ पिताजी भी हैं.
पर वो अलग अपनी रासलीला में लगे थे.
उन्हें क्या सुध थी की बगल के कमरे में उनकी बिटिया अपनी सुहागरात मना रही है.

खैर, जल्दी ही वरुण भी थक गया और सीमा से बोला- मेरा होने वाला है.
सीमा बोली- बाहर निकाल लो.
पर बाहर निकालते निकालते वरुण ने एक झटके में अपना लंड खाली कर दिया.

गाढ़ा वीर्य सीमा की चूत और पेट पर फ़ैल गया.
सीमा ने पास पड़ी अपनी नाईटी से अपने को पौंछा और वरुण से बोली- तुम ऊपर जाओ.

सीमा की चूत फट गयी थी.
नाईटी खून और वीर्य से सन गयी थी.

सीमा के दर्द भी बहुत हो रहा था.
वरुण को भेजकर सीमा ने जैसे तैसे बेडशीट साफ़ की और बाथरूम में जाकर गर्म पानी से तरेड़े लेते हुए सिकाई की.

अगली सुबह सीमा की हालत खस्ता थी.
उसने बुखार और बदन दर्द का बहाना बनाया.
मां से कह दिया कि पीरियड्स आये हैं. नाईटी भी खराब हो गयी. पेट में बहुत दर्द है.

सुनीता ज़ी ने उसे गर्म पानी की बोतल दी और वरुण ने भी नजर बचाकर शाम को उसे गर्भ निरोधक दवाई ला दी.

यह जवानी दीवानी कहानी कई भागों में चलेगी.
अभी तक की कहानी पर अपने विचार मुझे मेल और कमेंट्स में बताएं

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