शीला की जवानी-20

मैं और शीला जब नैंसी-संधू के घर पहुंचे तो वो लोग हमारा इंतज़ार ही कर रहे थे। संधू उसी मुक्तसरी कुर्ते पायजामें में था। नैंसी ने झीनी मैक्सी पहनी हुई थी। नैंसी की चूचियों के गुलाबी निप्पल मैक्सी में से साफ़ दिखाई दे रहे थे।

नमस्ते-नमस्ते के बाद मैं संधू के पास सोफे पर बैठ गया, और शीला सामने वाले सोफे पर बैठ गयी। नैंसी भी साथ वाले सोफे पर बैठी थी।

शीला की तरफ देख कर लंड खुजलाते हुए संधू बोला, “आ भाई जीते, सुना क्या हाल है? कैसा चल रहा है तेरा बिजली डिपार्टमेंट? पंजाब में बिजली सप्लाई की बड़ी खराब हालत है यार।”

संधू बात मुझसे कर रहा था, और देख शीला की तरफ रहा था। शीला की जवानी का जादू संधू के सर चढ़ कर बोल रहा था।

फिर मेरे जवाब का इंतजार किये बिना शीला की तरफ देख कर बोला, “शीला क्या हाल है, बड़ी सेक्सी लग रही है तू आज।”

शीला ने संधू को दुबारा नमस्ते की, और मुस्कुरा दी।

संधू ने लंड खुजलाया और फिर नैंसी को बोला, “नैंसी, भई खातिर करो अपने ख़ास मेहमानों की।”

नैंसी उठी और किचन की तरफ चली गयी। मैंने देखा झीनी मैक्सी में से नैंसी के चूतड़ों की लाइन साफ़ झलक रही थी। नैंसी “रशिया प्लस” वोदका और शीला के लिए पेप्सी ले आयी। नैंसी ने ही पेग बनाये। अपना हल्का और मेरा और संधू का वही पटियाला।

मैं दिन में इतनी पीने के चक्कर में नहीं था। खैर, संधू ने दो घूंट में ही अपना पेग खत्म कर लिया। एक और पटियाला डाल कर उठ खड़ा हुआ और शीला को बोला, “आजा शीला मेरी जान।”

एक हाथ में पेग पकड़ा और दूसरा हाथ शीला की कमर में डाल कर कमरे की तरफ बढ़ गया। नैंसी मुझसे बोली, “देख ली इस परम की हालात? शीला-शीला कर रहा है जब से अमित के घर से इसे चोद कर आया है।”

कुछ सेकेंड्स के बाद नैंसी फिर बोली, ” जीत देख ले। परम जैसे मर्दों का एक चूत चोदने से पेट नहीं भरता, इन्हें चूत नहीं चूतें चाहियें I तरह-तरह की चूतें।”

मैं कुछ जवाब देता इससे पहले ही नैंसी हंसते हुए बोली, “वैसे तो हम जैसी औरतों का ही एक लंड से चुदवाने से कहां पेट भरता है, हमे भी तो तरह-तरह के लंड चाहियें।”

मेरी भी हंसी छूट गयी, बात ही नैंसी ने ऐसी की थी।

वोदका का गिलास पकड़े हुए नैंसी मेरे पास आ कर बैठ गयी और मेरा लंड पैंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल लिया। नैंसी ने पूछा, “क्या बात है जीत, ज्योति नहीं आयी आज?”

मैंने कहा, “भरजाई शीला ज्योति के साथ शॉपिंग मॉल तक आयी थी, आगे फिर शीला मेरे साथ आयी है।”

फिर मैंने बताया, “वापसी में भी जब हमारी आख़री चुदाई होने वाली होगी तो मैं ज्योति को फोन कर दूंगा, और वो शॉपिंग मॉल पहुंच जाएगी। यहां से शीला शॉपिंग माल तक मेरे साथ जाएगी आगे ज्योति वहां से शीला को अपने साथ कार में ले जाएगी।”

नैंसी बोली, “इसका मतलब आज ज्योति यहां नहीं आएगी? आ जाती तो अच्छा था। वैसे भी ज्योति और शीला जैसी खूबसूरत लड़कियां परम की कमजोरी हैं। परम कह रहा था बड़े अरसे के बाद ज्योति और शीला जैसी लड़कियां चोदने को मिली हैं। असल में हमारे ग्रुप में ऐसी बढ़िया लड़कियां नहीं हैं। जवान, कड़क और टाइट चूत वाली लड़कियां। सब मेरी उम्र की ही हैं जिनकी चूतें चुदवा-चुदवा कर या तो भोसड़ा बन चुकी हैं या बनने वाली हैं।”

मैंने सोचा तो क्या इसलिए नैंसी ज्यादा गांड चुदवाती है? मगर मुझे ख्याल आया कि नैंसी की चूत का छेद अभी इतना भी तो नहीं खुला कि चूत को भोसड़ा ही कहना शुरू कर दिया जाए। मेरा कंडोम चढ़ा लंड तो नैंसी भरजाई की चूत में रगड़ा खा कर ही जाता है।

मैं अभी ये सोच ही रहा था कि नैंसी ज्योति के ना आने पर फिर बोली, “क्या बात है जीत क्या है ज्योति यहां आने से डरती है?”

 

मैंने नैंसी की इस बात का कोई जवाब नहीं दिया। फिर नैंसी ही दुबारा बोली, “अब इतना भी क्या डरना? चुदाई ही तो करवानी है, कोई मर्डर तो नहीं करना या बैंक तो नहीं लूटना।”

नैंसी की इस बात पर चुदाई ही तो करवानी है कोई मर्डर तो नहीं करना या बैंक तो नहीं लूटना, मेरी हंसी छूट गयी।

मगर फिर भी मैंने समझाने वाले अंदाज में भरजाई को बोला, “भरजाई वो बात नहीं, ज्योति भरजाई थोड़ी हिचकिचा रही है। आखिर तो संधू साहब उसके बॉस हैं। कम्पनी के अंदर के संधू साहब और ज्योति के ओहदे में बहुत ज़्यादा फरक है। कोइ रिश्तेदारी, यारी दोस्ती वाली बात तो है नहीं। कभी-कभार अमित के घर आना-जाना या ज्योति का अकेले आपके घर आना ठीक है, उसमें कोई बुराई नहीं।”

मैंने बात जारी रखते हुए कहा, “बॉस के साथ किसी फंक्शन में मेल मुलाक़ात हो तो उससे कोई फरक नहीं पड़ता। ऐसे फंक्शनों में कम्पनी के बहुत लोग होते हैं। कोइ उंगली नहीं उठाता। मगर इस तरह जब ज्योति का पति बाहर है, ज्योति के घर जाना, या ज्योति का यहां आना? कोई वजह भी तो होनी चाहिए। नैंसी भरजाई आप समझ रही हैं ना। इसमें संधू साहब की ही बदनामी होने का डर है।”

नैंसी कुछ सोच में पड़ गयी, और फिर बोली, “जीते बात तो तू सही बोल रहा है। अपने साथ काम करने वाली जूनियर लड़की के साथ चूत चुदाई की बात अगर खुल जाये तो बात का बतंगड़ बनते देर नहीं लगती। और फिर ऐसी चुदाई की बदनामी होती भी बड़ी खतरनाक है। नौकरी तक जाने का खतरा हो जाता है।”

फिर कुछ रुक कर ज्योति बोली, “वैसे तो कभी-कभार की चुदाई ही ठीक है मगर उसमें भी मुलाक़ात का बहाना ढंग का होना चाहिए। ज्योति के घर उसके पति की गैर मौजूदगी में जा कर उसे चोदना तो मुझे भी रिस्की ला रहा है। मैं समझाऊंगी परम को, इतना भी ना पागल ना बने ज्योति की चुदाई के लिए। कहीं उल्टा लेने के देने ही ना पड़ जाएं।”

फिर बात जारी रखते हुए बोली, “बात ये है जीते रोज तो परम मीट मच्छी खाता है I आधे से ज्यादा बोतल शराब एक बार में पी जाता है। अब ये सब निकले कहां? मैं तो घर की मुर्गी हूं। जब मन आता है पकड़ कर चोद लेता हैI

इसके फैक्ट्री वालों का ही एक ग्रुप हैं जिसमें इसकी ही उम्र के लोग है। वो मिलते रहते हैं आपस में, शराब पीते हैं, एक दूसरे की बीवियां चोदते हैं। मगर वही बात, उनमें ज्योति की उम्र की कोई भी औरत नहीं है, इस जवान शीला की तो बात ही छोड़ दो।”

ये बात करते हुए मेरा लंड नैंसी के हाथ में ही था। मेरा लंड सख्त हो चुका था। नैंसी बोली, “जीत चलें? ये तो तैयार है। आज भी उस दिन जैसी ही मस्त चुदाई करेगा?”

मैंने कहा, “भरजाई अब ये तो आप बताना, कैसी चुदाई हुई है उस दिन जैसी मस्त या उससे बढ़िया।”

हम उठे और दूसरे कमरे में चले गए। अंदर जा कर नैंसी ने अपने कपड़े उतार दिए और मैंने अपने। मैंने नैंसी से पूछा, “भरजाई आज? चूत या गांड?”

नैंसी भी हंस कर बोली, “ये भई क्या पूछने वाली बात है? दोनों, पहले गांड, फिर चूत, आजा।” और नैंसी बेड का सहारा ले कर चूतड़ पीछे करके खड़ी हो गयी।

लम्बी औरतों का ये फायदा है। जब कुहनियों के बल फर्श पर गांड पीछे करके खड़ी होती हैं लंड बिल्कुल गांड के छेद के सामने होता है।

मैंने पूछा, “भरजाई जैल कहां है?”

नैंसी बोली, “अरे, वो तो उस दूसरे कमरे में ड्रेसिंग टेबल के ऊपर वाली दराज में है। कल रात भी परम ने गांड चोदी थी। तभी से जैल की ट्यूब उस कमरे में है। जा ले आ।”

मुझे जाने में अजीब सा लगा। वहां संधू शीला के ऊपर चढ़ा हुआ होगा। मैंने कहा, “भरजाई आप ले आओ। मुझे ठीक नहीं लग रहा। वहां संधू साहब शीला को चोद रहे होंगे, और बीच में मैं पहुंच जाऊं बीच का बिच्छू बन कर?”

नैंसी हंसी, ” कोइ बीच का बिच्छू नहीं बनेगा। जब हम अपने ग्रुप में मिल कर चुदाई करते हैं तो सब कुछ सामने सामने होता। साले एक-दूसरे की बीवीयों को चोदते हैं और हद्द दर्जे की गंदी बातें करते हैं। बेशर्म हो चुके हैं सब ये सब, क्या औरतें क्या मर्द। जीत अब तू भी ये शर्म-वरम उतार और जा, जाके जैल लेकर आ और चुदाई कर मेरी।”

मैं उस कमरे की तरफ बढ़ा जहां शीला और संधू की चुदाई चल रही थी।

मैं अंदर पहुंचा तो देखा शीला नीचे थी। चूतड़ों के नीचे तकिया रक्खा हुआ था और टांगे हवा में उठा कर फैलाई हुई थी। संधू ने शीला को जकड़ा हुआ था और “ऊंह शीला… ऊंह शीला… आह शीला… क्या चूत है तेरी.. मजा आ गया” की आवाजों के साथ शीला को चोद रहा था।

शीला की आंखें बंद थी और उसने बाहों में संधू को जकड़ा हुआ था। नीचे से चूतड़ घुमा-घुमा कर शीला संधू के मोटे लंड की चुदाई का मजा ले रही थी।

मैं जैसे ही अंदर घुसा, संधू ने मेरी तरफ देखा। ना कुछ बोला, ना चुदाई रोकी। मैंने ड्रेसिंग टेबल की दराज में से जैल निकाली और बाहर निकल गया। संधू चुदाई में मस्त था, साथ ही शीला भी।

वापस कमरे में आ कर मैंने नैंसी को बताया कि कैसे संधू साहब शीला की ताबड़-तोड़ चुदाई में मस्त थे, और मेरी तरफ उन्होंने कोई ध्यान ही नहीं दिया।

नैंसी बोली, “जीत चुदाई के वक़्त कोई आये कोई जाए हम लोगों को कोई फरक नहीं पड़ता। तुझे बताया तो है हमारे लिए ये मामूली सी बात है। ग्रुप के लोग जब चुदाई के लिए इक्टठे होते हैं तो सब एक-दूसरे की बीवियां चोदते हैं वो भी एक-दूसरे के सामने। छोड़ परम और शीला को, और उनकी चुदाई को I तू ये बता जैल मिली?”

मैंने जैल की ट्यूब दिखाई तो नैंसी बोली, “आ इधर तू मेरी गांड रगड़ और चूत की आग बुझा।” नैंसी ने चूतड़ चौड़े कर लिए। नैंसी की गांड का हल्का भूरा छेद लंड लेने के लिए तैयार था।

नैंसी कि चिकने सफ़ेद चूतड़ मस्त करने के लिए बहुत थे। मैंने नैंसी की चिकनी गांड पर हल्का सा काटा और चूतड़ फैला कर गांड के छेद पर जुबान फिराई।

शीला और ज्योति दोनों कह रही थी, कि जब संधू ने उनकी गांड का छेद को चाटता है, तो उनको बड़ा मजा आता है।

जैसे ही मैंने नैंसी की गांड का छेद चाटा, नैंसी ने एक सिसकारी ली, “आआह.. जीत मजा आ गया।”

थोड़ी और गांड चटाई के बाद मैंने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया। जैल नैंसी की गांड के अन्दर बाहर और अपने लंड पर लगाई और एक ही झटके से फचाक की आवाज के साथ पूरा लंड नैंसी की गांड में बिठा दिया।

नैंसी गांड चुदवाने की शौक़ीन भी थी, और आदि भी हो चुकी थी। गांड का छेद ढीला हो चुका था। लंड फिसलता हुआ अंदर बैठ गया। कंडोम के कारण लगी रगड़ों ने नैंसी की सिसकरियां दुगनी कर दी। “आआह जीत क्या चक्कर है ऐसा रगड़ कर कैसे जाता है तेरा? कैसा लंड है तेरा?”

मैंने नैंसी को कमर सर पकड़ा और गांड चुदाई चालू कर दी। दस मिनट की चुदाई के बाद नैंसी का हाथ अपनी चूत मैं पहुंच गया। अगले दस मिनट की रगड़ाई में नैंसी झड़ने के करीब आ गयी और चूतड़ घुमाने शुरू कर दिए।

ना तो नैंसी ने मुझे लंड चूत में डालने के लिए बोला और ना ही मैंने नैंसी की गांड चोदना बंद किया। जल्दी ही नैंसी झड़ने के पास आ गयी और “आआह… जीत गयी… आआह… गयी” की आवाजें निकालने लगी। नैंसी ने जोर से चूतड़ घुमाए और शांत हो गयी। निकल गया था नैंसी की चूत का पानी। झड़ गयी थी नैंसी।

मेरा लंड नैंसी की गांड में ज्यों का त्यों खड़ा था। मैंने धक्के बंद नहीं किये। पांच सात मिनट के धक्कों ने नैंसी को फिर गरम कर दिया। नैंसी बोली, “जीत मेरी गांड की तो बस हो गयी है। चल अब चूत की रगड़ाई कर दे गरम हुई पड़ी है।”

मैंने खड़ा खूंटा गांड में से निकाला और एक झटके के साथ चूत में डाल दिया। लंड पर लगी जैल और नैंसी की चूत के चिकने पानी के कारण लंड फिसल कर अंदर चला गया।

अगली दस मिनट की चुदाई के बाद नैंसी का पानी फिर छूट गया। मैं खड़े लंड को नैंसी की चूत में डाले हुए वैसे ही खड़ा रहा।

पच्चीस मिनट से ज्यादा की चुदाई ने मुझे भी थका दिया था। नैंसी बोली, “जीत क्या चक्कर है, तेरा तो अभी भी खड़ा है। अब क्या करना है?

मैंने कहा, “भरजाई थोड़ा रेस्ट करते हैं फिर आख़री चुदाई करेंगे।”

नैंसी बोली, “चल फिर एक-एक वोदका का दौर और चला लेते हैं।”

मैं और नैंसी ड्राइंग रूम मे आ गए और वोदका के गिलास भरे और उठा लिए।

नैंसी फिर वही बात बोली, “जीत कुछ तो है तेरी चुदाई में, कुछ अलग सा। चूत और गांड की इतनी रगड़ाई? मैंने भी इतने लंड लिए हैं, ऐसी रगड़ाई तो कभी भी नहीं हुई जितनी तेरे लंड की चुदाई से हुई।”

अब मैंने भी सोचा, कंडोम का सस्पेंस खत्म होना चाहिए। फिर नैंसी को भी कंडोम के साथ चुदाई का ज्यादा मजा आएगा, जैसे ज्योति को आता है। शीला की तो चूत वैसे ही टाइट है। शीला की चूत में तो लंड जाता ही रगड़ खा कर है।

मैं नैंसी को बोला, “भरजाई कुछ है तो सही। इस बार की चुदाई से पहले बताऊंगा।”

नैंसी थोड़ी हैरान हुई, पर बोली कुछ नहीं। जब नैंसी की चूत फिर गरम हो गयी और वो चूतड़ इधर-उधर करने लगी तो मैं समझ गया, नैंसी लंड मांग रही थी। मैं खड़ा लंड लेकर नैंसी के सामने गया और अपने लंड की तरफ इशारा करके नैंसी को कहा, “भरजाई इधर देखो।”

नैंसी का ध्यान अब तक मेरे लंड पर नहीं गया था। वो तो गांड और चूत की चुदाई में ही मस्त थी।

नैंसी ने ध्यान से लंड की तरफ देखा और थोड़ी हैरानी से बोली, “जीत ये तो कंडोम लग रहा है। तू कंडोम चढ़ा कर चुदाई करता है? कंडोम के साथ चुदाई में तो चूत के अन्दर रगड़े नहीं लगते, पर तेरी चुदाई में तो चूत की बड़ी रगड़ाई होती है। तेरे से गांड चुदवा कर तो मेरी गांड ही हल्की फूल जाती है। उस दिन भी यही हुआ था।”

मैंने कहा, “भरजाई ये ख़ास कंडोम है। हाथ फेरो इस पर।”

नैंसी ने कंडोम पर हाथ फेरा, और फिर वही सब कुछ हुआ जो ज्योति के साथ हुआ था। सब कुछ समझ कर नैंसी बोली, “कमाल है जीत, तो ये बात है। ये उभरे हुए दाने और उभरी हुयी लाइनें, ये करती हैं करिश्मा चूत और गांड के अंदर। हम भी मंगवाएंगे ये। तेरे पास कुछ दो चार एक्स्ट्रा पड़े हैं?”

मैंने कहा, “भरजाई यहां तो यह एक लंड पर चढ़ा है एक और मेरी जेब में है। अगर वो आज नहीं इस्तेमाल होता तो वो आप रख लेना। पांच का एक पैकेट में ज्योति के हाथ भिजवा दूंगा, और साथ ही एड्रेस भी बता दूंगा जहां से मैं ऑन लाइन मंगवाता हूं। वैसे मैंने यहां भी एक केमिस्ट है कुलभूषण, उसको बोला है। अगर उसने मंगवा लिये तो उसका पता आप को भी दे दूंगा।”

नैंसी बोली, “कुलभूषण? वो मॉडल टाउन वाला? वो तो बड़ी अच्छी तरह जानता है हमें I हमारी गांड चुदाई में लगने वाली जैल वहीं से आती है।”

अभी हम बात कर ही रहे थे, कि संधू पायजामे का नाड़ा बांधता-बांधता ड्राइंग रूम में आ गया।

आते ही बोला, “क्या चुदवाती है ये लड़की। थकती ही नहीं। दो बार की धुआंधार चुदाई कि बाद मेरा तो बैंड बज गया, उसे अभी एक चुदाई और चाहिए। मैं तो एक पैग लगाने आया हूं वो अभी लेटी ही हुई है चूत खोल कर। पैग लगा कर जाकर एक बार और चोदूंगा। फिर संधू मुझ से बोला, “जीत तूने चोदनी है तो तू लगा ले चुदाई का एक ट्रिप। तब तक मैं एक पेग लगाता हूं।”

मेरे जवाब देने से पहले ही नैंसी बोल उठी, “जीत कैसे जाएगा? जीत ने अभी मेरी चुदाई करनी है।”

फिर नैंसी संधू को बोली, “तुम पहले इधर आओ और ये देखो।” नैंसी ने मेरे लंड की तरफ इशारा करके कहा।

संधू आगे आया और मेरे लंड की तरफ देखा और बोला, “ये तो कंडोम है, जीत तू कंडोम चढ़ा कर चुदाई करता है?”

नैंसी बोली, “परम ये कोई मामूली कंडोम नहीं। इस पर ये उभरे हुए दाने और उभरे हुई लाइनें ध्यान से देखो I ये लड़कियों की चूत और गांड में चुदाई कि दौरान रगड़ाई बढ़ाने का काम करता है जिससे लड़की को चुदाई का दुगना मजा आता है।”

फिर नैंसी ने संधू को कंडोम कि बारे में सब कुछ बता दिया कि अभी तक तो मैं ऑन लाइन मंगवाता हूं मगर अब मैंने कुलभूषण को भी ये कंडोम मंगवाने के लिए बोला है।

संधू ने एक बार फिर गौर से कंडोम को देखा और बोला, “कमाल है “! फिर मुझे बोला, “यार जीत ये तो मुझे भई बता कि तू कहां से मंगवाता है, कहां से मिलता है ये। वो मॉडल टाउन वाला कुलभूषण तो मुझे जानता है, उसको तो मैं बोल दूंगा, जब उसके पास ये आएंगे तो मुझे भी फोन कर देगा।”

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